Tuesday, 28 February 2017

माँ

माँ क्या है
माँ एक अहसास जो अपने आप में पूरी दुनिया है
माँ एक प्यारा रिश्ता
माँ का आंचल बरगद की छाया है जिसमें सुकून है
माँ शिक्षक और पाठशाला है
माँ ममता की मूरत है
माँ पूजनीय है
माँ हर दुःख का सामना करती है पर बच्चे को आंच नहीं आने देती
माँ खुद भूखी रहती है पर बच्चे का पेट भरती है
माँ वो शब्द है जो हर सुख और दुःख में बालक के मुख से निकलता है
माँ का स्थान ईश्वर के समान है इसलिए हमे माँ का आदर और सम्मान करना चाहिए
पर देखने में आया है कि कुछ लोग माँ का सम्मान नहीं करते, जिस माँ ने उसे जिंदगी दी, उसको इस संसार में जीने लायक बनाया उसी माँ को बोझ मान कर बुढ़ापे में अकेला छोड़ देते है
माँ ने अपनी जिमेदारी निभायी अब आपकी बारी है.
माँ को कुछ नहीं चाहिए सिर्फ आपका साथ चाहिए
माँ नहीं होती तो हम भी नहीं होते इसलिए उसका मान सम्मान कीजिये  

Sunday, 26 February 2017

अकेला

मनुष्य दुनिया में अकेला आया है
अकेला ही जायेगा
पर इस आने और जाने के अंतराल में उसकी मुलकात अनेक रिश्तों से होती है
माता-पिता,भाई बहन,गुरु मित्र और भी बहुत से रिश्ते
इन रिश्तों को निभाते हुए हमको अपनी एक पहचान बनानी होगी
समाज के सामने एक example set करना होगा जिससे लोग हमें एक अच्छे इंसान के रूप में याद करें।
बहुत लोग आते है और चले जाते हैं
सबको हम याद नहीं करते, याद वही किये जाते है जो समाज के लिए कुछ कर गुजरते हैं.
अपने लिए जिए तो क्या जिए, जीना उसी का नाम है जो दूसरों के लिए जिए.
दूसरों के लिए कुछ करके देखिये आपको आत्मिक सुख की अनुभूति होगी,लगेगा जीवन सफल हो गया


जीवन एक कविता






Saturday, 25 February 2017

सहनशीलता

कल एक न्यूज़ देखी कि छोटे से विवाद में कुछ लड़को ने एक लड़के की नाक काट दी
मैं सोचने पर मजबूर हुई कि आज हमारा समाज किस दिशा में जा रहा है ?
छोटी छोटी सी बातो पर हम अपना संयम खो देते है.
क्या किसी की जिंदगी से इस तरह खेलना  ठीक है. इस सबसे हमको क्या हासिल होता है?
क्या हम अपने ऊपर संयम नहीं कर सकते?
अगर हम इस आक्रोष को किसी सकारात्मक कार्य में इस्तेमाल करे तो हम समाज के लिए कुछ अच्छा काम कर सकते है/
प्लीज सोचिए!
अपने आक्रोष को सर्जनात्मक कार्य में ही इस्तेमाल करे और समाज के काम आये।
सहनशीलता मानव का एक गुण है जो सिर्फ उसी के पास है प्लीज इस पर अमल कीजिये।




Jeevan Ek kavita

Thursday, 23 February 2017

Zindagi ke har safar mai .. !!

Khoja khud ko bahut 
kho ke reh gaye hum bheed mai 
tod ke nikal hee aaye himat se bahaare 
phase the jis zanjeer mai 
ab toh terna sikh gaye ish bhawar mai 
chalte rahenge bin ruke zindagi ke har safar mai..!!

Khaamoshiyo ko bhi baatein aati hai
tasviro mai bhi hain kuch ehsaash 
mai chahe jitni bhi door hojaaaun 
lafzo ke sanaate hain mere pass 
beasar sa lagta hai har dard hu aise asar mai
chalte rahenge bin ruke zindagi ke har safar mai.. !! 


- Jeevan1Kavita.