Friday, 7 April 2017

कच्चे आम का पना

गर्मी का मौसम है। लू चल रही है। लू से बचने का आसान तरीका है कच्चे आम का पना। ये एक प्राचीन भारतीय पेय पदार्थ है। आम का पना स्वादिष्ट होने के साथ ही आपके शरीर को शीतलता और ताजगी देता है। आपको गर्मी व् लू से भी बचाता है। इसे बनाना बहुत ही आसान है साथ ही जल्दी भी बन जाता है। तो देखते है कि कच्चे आम का पाना कैसे बनता है -



सामग्री




कच्चे आम - ३ मीडियम आकार के
चीनी - १५० ग्राम (१/२ - ३/४ कप)
भुना जीरा पाउडर - २ चम्मच
काला नमक स्वादानुसार
काली मिर्च १/४ चम्मच
सफेद नमक स्वादानुसार
पुदीना - 20-30 पत्तियाँ


विधि


कच्चे आम का पना बनाने के लिए हम दो तरीके अपना सकते है ---


१ - प्राचीन समय में कच्चे आम को चूल्हे की राख में दबा कर भूना जाता था और फिर उस भुने हुए आम से पना बनाया जाता था पर आजकल चूल्हे की जगह गैस ने ले ली है। इसलिए जिस प्रकार हम गैस पर बैगन भूनते है उसी तरह कच्चे आम को भी भून सकते हैं। भुने हुए आम के गूदे से पाना बनाया जाता है।


२ - आजकल हम कच्चे आम उबाल कर पीस लेते हैं फिर उससे आम का पना बनाते हैं। लेकिन उबले हुए आमों को छील कर उनका गूदा निकलने की जगह उबलने से पहले कच्चे आमों को छील लेना ज्यादा आसान होता है। आज हम इसी तरीके से आम का पना बनायेंगे।


कच्चे आमों को धोकर छील लीजिये फिर उनकी गुठलियों से गूदे को अलग करके एक कप पानी के साथ प्रेशर कुकर में उबाल लीजिये।


मिक्सी में उबला हुआ गुदा, चीनी, कला नमक, सफेद नमक और पुदीने की पत्तियाँ डाल कर अच्छी तरह पीस लीजिये।


अब इसमें एक लीटर ठंडा पानी मिला कर छलनी में छान लीजिये।


आम का पना तैयार है। इसमें भुना जीरा और काली मिर्च दाल कर ठीक से मिक्स कीजिये।
बर्फ के टुकड़े दाल कर ठंडा-ठंडा ,पुदीने की पत्तियों से गार्निश कर सर्व कीजिये।

Thursday, 6 April 2017

Tips to fight summer/गर्मी से बचने के उपाय

ग्रीष्म ऋतु चल रही है। इस ऋतु में सूरज की तेज किरणों से मनुष्य ही नहीं बल्कि सभी जीव-जंतु, वनस्पतियां, नदी, तालाब, कुएं आदि प्रभावित हुए बिना नहीं रहते। खासकर अप्रैल, मई एवं जून की गर्मी व्यक्ति को अधिक व्यथित करती है जिससे बचने के उपाय हमें करना अतिआवश्यक है। आइए आप और हम निम्न उपायों को अपना कर काफी हद तक गर्मी की दस्तक से बच सकते हैं। गर्मी में हमारे शरीर को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचता है, इसलिए जितना हो सके गर्मी से बचने की कोशिश करनी चाहिए। घरेलू उपाय आजमा कर हम गर्मी में धूप से बच सकते है।
- सादा पानी आपकी त्वचा को तरोताजा रखता है। इसलिए पानी का सेवन अधिक करें। आप अगर बहुत थकान महसूस कर रहे हैं तो पानी के छीटों से आप फ्रेश महसूस करेंगे।
- खीरे के जूस को, पिसी हुई चंदन,मुल्तानी मिट्टी और चंदन पाउडर लगाने से आपकी त्वचा को ठंडक महसूस होगी। ये सभी प्राकृतिक मॉइस्चराइज़र की तरह काम करतें हैं। इससे चेहरे पर ठंडक महसूस होती है। 
- गर्मी के मौसम में खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। अधिक घी तेल मसालेदार खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे पाचन-क्रिया प्रभावित होती है। प्रकृति ने भी इस मौसम के लिए उपयोगी पानी की अधिक मात्रा वाले फल व् सब्जियां हमे दी हैं। 
- नीबू पानी, छांछ, लस्सी, नारियल पानी, कच्चे आम का पना, ठंडाई, बेल का शरबत, जलजीरा, सत्तू, खस का शरबत, तरबूज का जूस आदि पीना फयदेमंद होता है।
- गर्मी के मौसम में सूती वस्त्र ही पहनें, क्योंकि सूती वस्त्र पसीना सोखने में कारगर होते हैं। अक्सर ये देखने में आता है कि हम बच्चों को बनियान या समीज नहीं पहनाते केवल फ्राक या कमीज ही पहना देते है , ये ठीक नहीं है। बनियान या समीज अवश्य पहनाइए ये अंदरूनी वस्त्र लू से बचाने का काम करते है। 
- इस मौसम में तेज लपट और झुलसा देने वाली गर्म हवा चलती है। इससे बचने के लिए जब भी हम घर से बाहर निकलें तो एक गिलास ठंडा पानी पीकर ही निकलें। चलते समय एक प्याज भी जेब में रख लें तो लू लगने से बचा जा सकता। छतरी और धूप का चश्मा अवश्य साथ रखें। 
- पुदीने का प्रयोग कीजिये। पुदीने का रायता, पुदीने का मट्ठा, पुदीने की चटनी आदि का प्रयोग कीजिये। पुदीना ठंडक देता है। मैंने पुदीने की गडडी को फूलों की तरह गुलदस्ते में सजाते हुए भी देखा है। दुकानदार गर्मी के मौसम में पुदीने की गडडी को गुलदस्ते में सजाते हैं। उसकी खुशबू से ठंडक मिलती है। 
अगर आप इन बातो का ध्यान तो गर्मी से कुछ हद तक राहत मिल सकती है। कहा भी गया है कि स्वास्थ्य ही जीवन है और स्वास्थ्य ही धन है।


जीवन एक कविता 






Wednesday, 5 April 2017

रामनवमी

Hello friends रामनवमी की आप सभी को शुभकामनायें। 
'रामनवमी' हिन्दुओं का प्रसिद्द पर्व है। यह चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाया जाता है। इस दिन को भगवान श्री राम के जन्मदिन के रूप में मनाते हैं। राम जन्म को रामनवमी के रूप में पूरे देश में मनाया जाता है। इनका जन्म अभिजित नक्षत्र में दोपहर बारह बजे चैत्र शुल्क पक्ष नवमी को हुआ था इसलिए सभी भक्तजन अपना चैत्र नवरात्री का उपवास दोपहर बारह बजे पूरा करते हैं और अन्न का सेवन करते हैं । घरों में खीर पूरी और हलवे का भोग बनाया जाता हैं। कई जगहो पर अखंड रामायण का पाठ किया जाता है। रथ यात्रा निकाली जाती है। रामनवमी के दिन जगह-जगह घरों और मंदिरों में श्री राम की पूजा-अर्चना की जाती है और झांकियां सजाई जाती हैं। सभी लोग त्यौहार को हर्ष व उल्लास के साथ मनाते हैं।  
श्री रामचंद्र का जन्म एक उद्देश्य के साथ हुआ था। जब जब इस धरती पर पाप और अत्याचार बढ़ता है तब भगवान मानव के रूप में इस धरती पर जन्म लेते है। पाप का विनाश करने के लिए ही भगवान विष्णु ने राम के रूप में जन्म लिया था। 
श्री रामचंद्र का जीवन त्याग और संघर्ष से भरा है। हमें स्मरण रखना चाहिए कि श्रीराम ने त्याग और संघर्ष जैसे कष्टमय मार्ग पर चलकर स्वयं को मर्यादा पुरुषोत्तम के स्वरूप में प्रस्तुत किया। सत्य के  मार्ग पर हमेशा चलते रहे, अनेक कष्ट सहे मगर फिर भी लोक कल्याण के लक्ष्य से डिगे नहीं, हरदम आगे बढ़ते रहे।  वास्तव में भगवान राम ने परुष चरित्र को चरितार्थ किया था। श्री राम ने धर्म और कर्म को जीवन का आधार बनाया। सत्य और धर्म के मार्ग पर चलकर रावण जैसे राक्षस से इस धरती को मुक्त किया। 
एक प्रकार से भगवान राम का जन्म दिन रामनवमी बुराई पर अच्छाई पर्व है। रामनवमी पर यह दृढ़निश्चय करें कि अपने मन और मार्ग को श्रीराम की भक्ति में लगा देंगे और कभी गलत काम नहीं करेंगे। 


जीवन एक कविता 

Monday, 3 April 2017

सिंघाड़े के आटे की दही कतली

भारत में व्रत की परंपरा सदियों से है। व्रत कई तरह के होते हैं- कुछ व्रत ऐसे होते हैं जिनमें पानी तक नही पिया जाता है जैसे कि, करवा चौथ। कुछ व्रत ऐसे होते हैं जिनमे खाली फलाहार खाया जाता है, जैसे कि- जन्माष्टमी, नवरात्रि, एकादशी आदि ---
आजकल नवरात्रि पर्व चल रहा है। आप श्रद्धा से व्रत रखें और बनाए फलाहारी खाना अपने परिवार के लिए। 
आज मैं आपके साथ शेयर कर रही हूँ सिंघाड़े के आटे की दही कतली। इसको बनाने के लिए 


सामग्री 


१ कप सिंघाड़े का आटा 
२/५ कप पानी 
३ टेबल स्पून देसी घी
१/४ चम्मच जीरा
सेंधा नमक स्वादानुसार
काली मिर्च स्वादानुसार
१ चम्मच हरी मिर्च बारीक कटी हुई
२ कप दही
१/४ चम्मच भुना हुआ जीरा पाउडर
लाल मिर्च स्वादानुसार
इमली की मीठी सोंठ
हरी चटनी
१ चम्मच हरा धनिया बारीक हुआ


विधि


गैस पर एक नॉनस्टिक पैन रखें, गर्म होने पर घी डाले। घी के गर्म होने पर जीरा भून लें । आटा डाल कर मध्यम आँच पर सुनहरा होने तक भून लें। अब इसमें पानी मिला कर गाढ़ा होने तक पकाये इसी समय इसमें हल्का सेंधा नमक, काली मिर्च और हरी मिर्च भी मिला दें। एक थाली में घी लगा कर चिकना कर ले। सिंघाड़े के मिश्रण को इसपर फैला दे। ठंडा होने पर कतली या बर्फी की शेप में काट लें।
एक बाउल में दही दाल कर अच्छे से फेंट लें। दही में भुना हुआ जीरा पाउडर, लाल मिर्च और सेंधा नमक मिक्स कर लें। सर्विंग डिश में कतली सजा दें ऊपर से दही डाले। मीठी सोंठ, हरी चटनी और हरे धनिये से गार्निश करके सर्व कीजिये।
सिंघाड़े के आटे की दही कतली के साथ व्रत को एन्जॉय कीजिये.


जीवन एक कविता












Sunday, 2 April 2017

सिंघाडे के आटे का हलवा

नवरात्र शुरू हो गए हैं , कहते है की इन दिनों व्रत रखने से मानसिक और शारीरिक कष्ट दूर होते हैं। आपके परिवार में कोई व्रत रख रहा है तो उसके लिए कुछ खास बनाइये क्योंकि इन दिनों अनाज खाना सम्भव नहीं होता। सिंघाडे के आटे का हलवा आपको जरूर पसंद आयेगा। इसे बनाना बहुत ही आसान है। चलिए सीखते हैं हलवा बनाना --


सामग्री


१ कप सिंघाडे का आटा
१ कप चीनी
३ कप पानी
६ चम्मच घी
१/४ चम्मच इलायची पाउडर
१० से १२ बादाम कटे हुए
१० से १२ पिस्ते कटे हुए
१/४ कप कद्दूकस किया हुआ सूखा नारियल


विधि


गैस पर एक बर्तन में पानी और चीनी पकने रख दें एक उबाल आने तक पकाये।
दूसरी गैस पर एक नॉनस्टिक पैन या कड़ाही रखें। गर्म होने पर घी डाले। घी के मेल्ट होने पर सिंघाडे का आटा का डाले और उसे गुलाबी होने तक भून लें। आटा जब भुनने लगता है तो उसमें से खुशबू आने लगती है। अब उसमें कद्दूकस किया हुआ सूखा नारियल डाल दीजिये और मिक्स कीजिये। अब इसमें चीनी वाला पानी डाल दें और गाड़ा होने तक पकाइये। कटे हुए बादाम, पिस्ते और इलायची पाउडर से गार्निश करके गर्म गर्म सर्व कीजिये।
आशा है आपको और आपके परिवार को सिंघाडे के आटे का हलवा जरूर पसंद आयेगा।


जीवन एक कविता

Saturday, 1 April 2017

राजगीर/चौलाई का चीला

नवरात्र की रौनक है। घर घर में देवी की प्रतिष्ठा की गयी हैं। माँ के भक्तों ने उपवास रखें हैं। माँ का भोग लगाने के लिए सभी तरह तरह के फलाहार बना रहे हैं। आइये आज हम बनाते हैं राजगीर/चौलाई का चीला --


सामग्री


१ कप राजगीर का आटा 
१/५ कप कद्दूकस की हुई घिया 
१ हरी मिर्च बारीक कटी हुई 
१ चम्मच हरा धनिया बारीक कटा हुआ 
सेंधा नमक स्वादानुसार 
काली मिर्च स्वादानुसार
२ टेबल स्पून दही 
देसी घी/तेल 
हरी चटनी 
दही 
आलू की सब्जी 




विधि


एक बाउल में राजगीर का आटा लें उसमें घिया, हरी मिर्च, हरा धनिया, सेंधा नमक और काली मिर्च दाल कर ठीक से मिक्स कर लें। अब इसमें दही मिक्स करें और पानी की सहायता से एक घोल तैयार करें जैसा घोल आप बेसन का चीला

बनाने के लिए करते हैं। नॉनस्टिक पैन को गैस पर रखिये गर्म होने पर थोड़ा सा घी डालिये फिर एक करछी की हेल्प से थोड़े से घोल को डालिये और गोल फैला दीजिये। थोड़ा सा घी डालिये और चीले को दोनों ओर से गोल्डन ब्राउन होने तक 
सेंक लीजिये। गर्म गर्म चीले को हरी चटनी, दही और आलू की सब्जी की सब्जी के साथ सर्व कीजिये। राजगीर के अलावा आप कूटू के आटे का भी बना सकते हैं।  
enjoy नवरात्र। 


जीवन एक कविता