Wednesday, 29 March 2017

कूटू के आटे की दही पकौड़ी

नवरात्रि का पर्व हो और उपवास हो, ऐसा हो नहीं सकता। नवरात्रि में मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए अमूमन सभी भक्तजन व्रत करना पसंद करते हैं, लेकिन उपवास में फलाहार भी बहुत जरूरी होता है। फलाहारी के नाम पर हम कई बार ऐसा खा लेते हैं, जो काफी हैवी होता है। यहां हम आपके  लिए लेकर आएं हैं कुछ तरह के व्यंजन, जो हेल्दी होने के साथ-साथ आपका एनर्जी लेवल  बनाए रखने में भी आपकी मदद करेंगे। कूटू के आटे की दही पकौड़ी के लिए हमे चाहिए 


सामग्री


१ कप कूटू का आटा 

२ कप दही
भुना जीरा आधा चम्मच
लाल मिर्च पाउडर स्वादानुसार
सेंधा नमक स्वादानुसार
/ चम्मच चीनी
तेल तलने के लिए
इमली की मीठी सोंठ 
धनिया फॉर गार्निश



विधि
एक बाउल में कूटू का आटा ले पानी डाल कर घोल लें। घोल उतना गाड़ा रखे जैसा आप दही की पकौड़ी बनाते समय रखतीं हैं। अब इस घोल को थोड़ी देर फेट ले। फेटने से पकौड़ी soft बनती है। अब कड़ाही में तेल गर्म करें और पकौड़ी के आकार में घोल से छोटी छोटी पकौड़ी सुनहरी होने तक ताल लें फिर इनको पानी में भिगो दे पानी में थोड़ा सा सेंधा नमक दाल दीजिये। १५ मिनट बाद पानी change कर दीजिये। १५ मिनट बाद फिर से पानी change कीजिये। पानी change करने से पकौड़ी की सारी चिकनाई निकल जाती है और पकौड़ी खाने में एकदम हल्की होगी। ३० मिनट के बाद साडी पकौड़ी पानी से निचोड़ कर निकल ले। अब एक बाउल में दही डाल कर फेट ले। दही में भुना जीरा, लाल मिर्च,सेंधा नमक और चीनी मिला लें। अब पकोड़ियों को दही में मिक्स करें। हरे धनिये और इमली की मीठी सोंठ से गार्निश करके सर्व करे। 
जीवन एक कविता 

































 


Tuesday, 28 March 2017

हिन्दू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि

Hello friends आप सबको हिन्दू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं।
हिन्दू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि का मंगलवार से प्रारंभ हो गया है। हर साल में चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक चलने वाले नवरात्र ही ज्यादा लोकप्रिय हैं जिन्हें मां भगवती की आराधना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। धर्म ग्रंथों, पुराणों के अनुसार चैत्र नवरात्रों का समय बहुत ही भाग्यशाली बताया गया है। इसका एक कारण यह भी है कि प्रकृति में इस समय हर और नये जीवन का, एक नई उम्मीद का बीज अंकुरित होने लगता है। जनमानस में भी एक नई उर्जा का संचार हो रहा होता है। लहलहाती फसलों से उम्मीदें जुड़ी होती हैं। सूर्य अपने उत्तरायण की गति में होते है। ऐसे समय में मां भगवती की पूजा कर उनसे सुख-समृद्धि की कामना करना बहुत शुभ माना गया है। क्योंकि बसंत ऋतु अपने चरम पर होती है इसलिए इन्हें वासंती नवरात्र भी कहा जाता है।
माता दुर्गा के नौ रूपों का उल्लेख भी दुर्गा-सप्तशती के कवच में है जिनकी साधना करने से भिन्न-भिन्न फल प्राप्त होते हैं। कई साधक अलग-अलग तिथियों को जिस देवी की हैं, उनकी साधना करते हैं, जैसे प्रतिपदा से नवमी तक। 28 मार्च मंगलवार को कलश स्थापना (घट स्थापना) के साथ 9 दिन की आराधन का पर्व शुरू होगा। नवरात्र 28 मार्च से 5 अप्रैल तक चलेंगे। मंगलवार को कलश स्थापना का मुहूर्त सुबह 8.28 बजे से है। जानिए किस दिन करनी है किसकी पूजा:
28 मार्च : पहला दिन : कलश स्थापना देवी शैलपुत्री की पूजा
29 मार्च : दूसरा दिन : द्वितीया मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
30 मार्च : तीसरा दिन : देवी मां चंद्रघंटा का पूजन गणगौरी पूजन
31 मार्च : चौथा दिन : देवी के चौथे स्वरूप देवी कूष्मांडा का पूजन
01 अप्रैल : पांचवा दिन : शिवपुत्र कार्तिकेय की मां स्कंदमाता की पूजा
02 अप्रैल: छठा दिन : देवी कात्यायनी की पूजा
03 अप्रैल: सातवां दिन : कालरात्रि मां की पूजा
04 अप्रैल: आठवां दिन : आठवीं देवी महागौरी की पूजा श्री दुर्गा अष्टमी व्रत
05 अप्रैल: नौवा दिन : देवी भगवती के नवम स्वरूप सिद्धिदात्री का पूजन


भारत के भिन्न भिन्न राज्यो में अलग अलग नामो से मनाया जाता है। 
चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को महाराष्ट्र में 'गुड़ी पड़वा' कहा जाता है। गुड़ी का अर्थ 'विजय पताका' होता है तो आन्ध्र और कर्नाटक में उगादी के नाम से जिसका अर्थ होता है नए युग की शुरुआत यानि नववर्ष। 
दोस्तों नववर्ष आपके लिए मंगलमय एवं शुभ हो। 


जीवन एक कविता