Monday, 27 March 2017

ईर्ष्या/जलन =JEALOUSY

ईर्ष्या यानि Jealousy
ईर्ष्‍या एक भाव है। किसी को अपने से अधिक उन्नतसंपन्न या सुखी देखकर मन में होनेवाला वह कष्ट या जलन जिसके साथ उस व्यक्ति को वैभव सुख आदि से वंचित करके स्वयं उसका स्थान लेने की अभिलाषा लगी रहती है। ईर्ष्या तुलना है। और हमें तुलना करना सिखाया गया है, हमनें तुलना करना सीख लिया है, हमेशा तुलना करते हैं। किसी और के पास ज्यादा अच्छा मकान है, किसी और के पास ज्यादा सुंदर शरीर है, किसी और के पास अधिक पैसा है, किसी और के पास करिश्माई व्यक्तित्व है। जो भी तुम्हारे आस-पास से गुजरता है उससे अपनी तुलना करते रहो, जिसका परिणाम होगा, बहुत अधिक ईर्ष्या की उत्पत्ति। तुलना बहुत ही मूर्खतापूर्ण वृत्ति है, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति अनुपम और अतुलनीय है। एक बार यह समझ तुम में जाए, ईर्ष्या गायब हो जाएगी। प्रत्येक अनुपम और अतुलनीय है। तुम सिर्फ तुम हो: कोई भी कभी भी तुम्हारे जैसा नहीं हुआ, और कोई भी कभी भी तुम्हारे जैसा नहीं होगा। और ही तुम्हें भी किसी और के जैसा होने की जरुरत है। इसलिए तुलना की कोई जगह नहीं होनी चाहिये और अगर तुलना करनी ही है तो अपने से नीचे वाले से तुलना करो क्योंकि उनको उनको देखकर हमे जलन नहीं होती बल्कि महसूस होता है कि हमारे पास तो बहुत कुछ है। 
ईर्ष्या एक इस भाव जो दूसरों से ज्यादा खुद को जलती है। यदि आप किसी को सुख या खुशी नहीं दे सकते तो कम से कम दूसरों के सुख और खुशी देखकर अपने आपको ईर्ष्या की आग में ना जलाएं। ईर्ष्‍या में मुख् रूप से एक अपूर्णता का भाव छिपा होता है। यदि आप अपने जीवन में संतोष और संपूणता का अनुभव करेंगे तो आपके जीवन में ईर्ष्या या जलन का कोई स्थान नहीं होगा। इसलिए अपने जीवन में सुख और आनंद को जगह दीजिये। यदि आप आनंद के भाव से पूरी तरह भरे हों, तो आपके भीतर किसी के भी प्रति ईर्ष्या का भाव नहीं होगा।


जीवन एक कविता 






Sunday, 26 March 2017

अंगूर और अखरोट का रायता

Hello friends जैसा की आप जानते है कि गर्मी आ गई है और ऐसे मौसम में खुद को ठंडा रखने के लिए हम ठंडक देने वाली चीजो का सेवन करते हैं। इन्हीं में एक है दही। दही को हम अनेक तरह से अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं जैसे लस्सी, मट्ठा, रायता और भी अनेक प्रकार से। आज में आपके साथ रायते की एक रेसिपी शेयर करती हूँ --


अंगूर और अखरोट  का रायता
 
सामग्री
कप दही
/ कप कटे हरे और काले अंगूर
/ कप कटे अखरोट
भुना जीरा आधा चम्मच
लाल मिर्च पाउडर स्वादानुसार
नमक स्वादानुसार
/ चम्मच कला नमक
/ चम्मच चीनी
/ चम्मच गरम मसाला
हरा धनिया फॉर गार्निश
विधि
एक बाउल में दही डाल कर फेट ले फिर उसमें कटे अंगूर और अखरोट डाल कर मिला ले। 
अब सभी मसाले और चीनी  डाल कर ठीक से मिक्स कर ले।
ऊपर से हरे धनिये से गार्निश करके सर्व करे। 
जीवन एक कविता 

Tip for cooking

कल मैं अपने एक परिचित के घर गई। थोड़ी देर बैठने के बाद वे बोली कि लंच बनाना है आप किचिन में ही आ जायो। मैंने बोला की मैं भी आपकी मदद कर देती हूँ। हम किचिन में गए। उनको दाल और् सब्जी बनानी थी। बिना किसी तैयारी के उन्होंने गैस जलाई और कुकर गैस पर रख दिया उसके बाद उन्होंने दाल निकाली धोई फिर कुकर में डाली। ये सब देख कर मुझे बहुत अजीब लगा क्योंकि में गैस जलाने से पहले कुछ तैयारी करती हूँ ,कुछ बातें मेरे दिमाग में भी रहती हैं वही मैं आपके साथ शेयर करती हूँ ---
-किचिन में जाने से पहले बालों को बांध लीजिये।
-कपड़े ऐसे पहने जिससे आपको कुकिंग करते समय कोई परेशानी न हो  जहाँ तक हो सूती कपड़े ही पहने।
-कुकिंग से पहले प्लान कीजिये क्या,कैसे और कितने लोगो के लिए कुकिंग करनी है।
-सफाई का ध्यान रखें।
-जो भी बनाना है उससे सम्बंधित सभी सामग्री निकल हर पास में रखें।
-मात्रा के अनुसार ही बर्तनों का चयन करें। मान लीजिये आपको एक या दो लोगों के लिए दाल बनानी है और आप ४ लीटर के कुकर में बना रही है तो इससे ईंधन की वेस्टेज है और पकने में भी टाइम लगेगा इसलिये सही बर्तन का ही प्रयोग करें।
-आप जो भी बना रहे है उसमें खाने वालो की पसंद का ध्यान रखें।
-आप जो भी कुक कर रहे है उसे step by step ही बनाये।
-समय का ध्यान रखें। ऐसा न हो की खाने वाले टेबल पर आ जाएं और आप कुकिंग में ही busy हैं।
-सबसे जरुरी बात जो भी कुक करें दिल और प्यार से बनाये। दिल से बनाई हुई चीज हमेशा टेस्टी बनती है।
अगर आप इन बातों को ध्यान में रखेंगी तो कम समय में आप टेस्टी खाना बना सकती है।
आशा है ये टिप्स आपके लिए हेल्पफुल होंगे।


जीवन एक कविता 

Wednesday, 22 March 2017

Planning

Planning मतलब योजना। किसी भी कार्य को योजनाबद्ध तरीके से करना ही प्लानिंग है। उद्देश्यपूर्ण जीवन ही सफल जीवन होता है और जीवन में सफल होने के लिए एक भविष्य - योजना का होना अत्यंत आवशयक है।
बालक जब जन्म लेता है वो इन सब से अनजान होता है पर उसके जन्म लेते ही उसके माता पिता उसके सफल जीवन के लिए योजना बनाना शरू कर देते है। infact योजना तो उसके जन्म से पहले ही शरू हो जाती है। जैसे बच्चे का जन्म किस हॉस्पिटल में होना है ,बच्चे का नाम क्या रखना है , उसके कपड़े बनाना और भी बहुत सारी तैयारी उसके जन्म से पहले ही की जाती है। बच्चा ही कल का नागरिक है। इसलिए बच्चे के सही भविष्य के लिए लक्ष्य का चुनाव करना जरूरी होता है। लक्ष्य का चुनाव करने के बाद योजना बनानी होती है और उस योजना को अमल में लाना होता है। जीवन के हर क्षेत्र में हमें planning की जरूरत है बिना योजना के हम कोई भी कार्य सुचारु रूप से नहीं कर सकते। स्कूल,कॉलेज ,सर्विस ,खेल दैनिक दिन चर्या ,परिवार सभी में प्लानिंग जरुरी है।
परिवार ,समाज और देश सभी को सुचारू रूप से चलाने के लिए योजना बहुत आवश्यक है। प्रतिदिन हम planning करते है अगले दिन की हमे क्या करना है कैसे करना है और इसी पर हम अमल करते है इसके बिना हम कुछ नहीं कर सकते। planning ही हमें सफल, बनाती है।
आपके साथ मैं कुछ अनुभव share करना चाहती हूँ। मेरे एक परिचित है उनके घर बच्ची का जन्म हुआ। वो एक मध्यमवर्गीय परिवार से हैं इसलिए उन्होंने अपनी बच्ची के उज्जवल भविष्य के योजना बनाई। इस योजना के तहत उन्होंने बच्ची की पढ़ाई और शादी के लिए LIC की पॉलिसी ली जिसके तहत वो प्रतिमाह थोड़ा थोड़ा पैसा जमा करते थे जिससे बच्ची की उच्च शिक्षा के समय उनको पैसे को लेकर कोई परेशानी नहीं हुई ऐसा ही उसकी शादी के समय भी ऐसा ही हुआ। प्लानिंग से चलने की वजह से वे अपनी बच्ची का उज्जवल भविष्य बना सके।
एक और अनुभव में आपके साथ शेयर करती हूँ, मेरी बहन के परिवार में बहू आई उसकी planning सुन कर मैं दंग रह गयी। उसने परिवार में जन्मदिन और शादी आदि के अवसर gift देने के लिए बैंक में एक account खोला जिसमें वो every month कुछ पैसे जमा करती है। मैं उसकी इस planning की क़ायल हो गई और उससे सीखने को भी मिला। So please planning कीजिये और अपने जीवन को सहज,सरल सफल बनाइये।




जीवन एक कविता

Tuesday, 21 March 2017

विवाह

विवाह वह सामाजिक एवं धार्मिक प्रकिया जिसमें स्त्री एवं पुरुष को पति-पत्नी के रूप में मान्यता मिलती है।
विवाह क्या है ? विवाह कितने प्रकार के होते है ? कैसे होते है ? इन सब पर मैं बात नहीं करुँगी क्योंकि हर धर्म और जाति में विवाह के अलग अलग रूप हैं। सभी अपने धर्म की रीति रिवाजो के अनुसार विवाह बंधन में बंधते है। आजकल पारंपरिक विवाह रीति के साथ ही कोर्ट मैरिज भी अनिर्वाय हो गयी है। विवाह एक इंस्टीटूशन है। विवाह एक पवित्र एवं मधुर बंधन है जिसमें कटुता के लिए कोई जगह नहीं है। भारतीय समाज में विवाह केवल दो लोगो का नहीं बल्कि दो परिवारों का मिलन है। ये मिलन प्यार और विश्वास की नींव पर होना चाहिए। परन्तु देखने में आया है विवाह आज व्यापार बन गया है। अगर आप अपनी लड़की के लिए लड़का देख रहे तो सबसे पहले आपसे पूछा जाता है कि आप शादी में कितना पैसा खर्च करेंगे। लड़की की योगिता , उसकी पढ़ाई ,उसका स्वभाव ,उसका काम कोई मान्यता नहीं रखता सिवाय पैसे के। अगर लड़की के पिता के पास लाखों करोड़ो नहीं है तो क्या वह शादी से वंचित रह जाएगी ? आज एक लड़की का पिता इसी चिंता में रहता है कि उसके पास पैसा नही है तो वो शादी कैसे करेगा ? अपनी सारी जमा पूँजी लड़की को योग्य बनाने में लगा दी सोचा था की लड़की पढ़ लिख जाएगी ,कमाने लग जाएगी तो अच्छा लड़का मिल जायेगा। पर उसे क्या पता था कि शादी के लिए पैसा चाहिए। ये सब देख कर लगता है कि हमारा समाज विशेष रूप से युवा वर्ग कहाँ जा रहा है। आज हमारा समाज
जितनी उन्नति कर रहा है उतना ही पीछे भी जा रहा है। विवाह को लेकर हमारी सोच वही की वही है। हमारी पढ़ाई का क्या फायदा जब हमारी सोच ही छोटी है। अपनी सोच का दायरा बड़ाइये। सोचिये उस पिता के बारे में जो पाल पोस कर अपनी बेटी को बड़ा करता है और एक दिन उसे हमेशा के लिए किसी और को सोंप देता है। अगर आपको अपने बेटे को विदा काना पड़े तो कैसे लगेगा।  हमे तो थैंकफुल होना चाहिए उस पिता का जो अपनी लड़की को विदा करता है। मैं जानती हूँ कि आज समाज में बदलाव आ रहा है पर वो बहुत कम है। यही कारण है आज लड़कियों की शादी आसान नहीं है। अगर लड़के लड़किया अपने आप पसंद कर लेते है तो ठीक है अन्यथा आसान नहीं है।
मेरा निवेदन है सभी माता-पिता से कि इस बारे में सोचे और अपने लड़को को भी बताये की विवाह एक पवित्र रिश्ता है जिसमें पैसे के लिए कोई जगह नहीं है। युवा वर्ग को आगे आने की जरूरत है वही इसमें बदलाव ला सकता है। जरूरत है एक कदम उठाने की क्योंकि हर लड़की का हक है की उसे भी एक सच्चा जीवनसाथी मिले। प्लीज सोचिये और अमल कीजिये।


जीवन एक कविता 

Sunday, 19 March 2017

Planning before go to fruits & vegetable market

हेलो friends आज जब मैं सब्जी और फल खरीदने गयी तो जल्दी में बैग ले जाना भूल गयी जिस कारण मुझे सब्जियां लाने में परेशानी हुई। इसने मुझे सोचने पर बाध्य किया की जाने से पहले मुझे planning करनी चाहिए जिससे कोई परेशानी न हो। कुछ points है जो मैं आपके साथ share करना चाहती हूँ।
- लिस्ट बना लीजिये की आपको कौन कौन सी सब्जी और फल खरीदने हैं।
- कितने members और कितने दिन के लिए सब्जी और फल खरीदने हैं।
- सोच लीजिये की किस मार्किट में जाना है मेरे विचार से घर के नजदीक वाले मार्किट में जाएं और जहाँ सब्जी एवं फल ताजे मिलते हों।
- अपने पर्स को चेक कर लीजिये उसमें सभी तरह के नोट और पैसे होने चाहिए। जैसे १०/,२०/५०/और १००/ के नोट होने चाहिए। अगर आप e payment करना चाहते है तो कार्ड, मोबाइल आदि भी रख लीजिये।
- बैग carry कीजिये।
- comfortable कपड़े पहन कर जाये।
- अगर आपके पैर में दर्द है तो आरामदायक जूते या चप्पल पहन कर जाये।
- यदि सब्जी market पास है तो ज्यादा दिन की सब्जी न लाए क्योंकि कुछ सब्जी और फल जल्दी खराब हो जाते हैं।
- सब्जी खरीदते समय घर के सभी सदस्यों की पसंद का ध्यान रखें।
इन बातों पर अगर हम ध्यान देंगे तो हमारी शॉपिंग ठीक से होगी.


जीवन एक कविता 

Saturday, 18 March 2017

शिक्षा

हैलो friends आपसे कुछ समय बात नहीं हो पाई क्योंकि मैं घर पर नहीं थीं। एक लंबे अंतराल के बाद आपसे रुबरु हो रही हूँ।
आज हम शिक्षा के बारे में बात करते हैं। शिक्षा क्या है ? बालक जब जन्म लेता है तो वो कोरे कागज की तरह होता है। जैसे जैसे वो बड़ा होता है वो नयी नयी चीजें सीखता है। हर पल वो कुछ नया अनुभव करता है। अनुभव करना या किसी बात को जानना ही शिक्षा है। शिक्षा का दायरा सीमित न होकर विस्तृत है। मानव जीवन से लेकर मरण तक शिक्षा का पाठ पढ़ता है। शिक्षा दो तरह से मिलती है एक तो वो जो जिंदगी हमें सिखाती है दूसरी वो जो हम स्कूल और कॉलेज में सीखते हैं। प्राचीन कल में शिक्षा गुरुकुलों में होती थी। छात्र पूर्ण शिक्षा ग्रहण करके ही घर वापिस लौटता था। लेकिन आज जगह-जगह सरकारी और गैर-सरकारी विद्यालयों में शिक्षण कार्य होता है । शिक्षा हमारे समाज की आत्मा है जो कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को दी जाती है यानि हम अपने बड़ो से सीखते है और अपने बच्चो को सिखाते हैं। बालक का मन कोमल होता है वो अपने माता पिता के आचरण को देखकर बहुत कुछ सीखता है इसलिए बच्चे के सामने हमारा आचरण संतुलित होना चाहिए। अच्छी आदतें बच्चा घर से ही सीखता है। यही आदतें उसको एक अच्छा इंसान बनाती हैं। दूसरी शिक्षा वो जो हम स्कूल में प्राप्त करते हैं। वहां पर शिक्षक भिन्न-भिन्न विषयों की शिक्षा देते हैं जिससे उसका मानसिक स्तर धीरे-धीरे ऊपर उठने लगता है। उसके मस्तिष्क में तरह-तरह के प्रश्न उठते हैं। इन सब प्रश्नों का उत्तर हमें शिक्षा के द्वारा मिलता है। जैसे-जैसे हम शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ते जाते हैं, वैसे-वैसे हमारा ज्ञान विस्तृत होता जाता है। ज्ञान का अर्थ केवल शब्द ज्ञान नहीं अपितु अर्थ ज्ञान है मतलब हम जो सीख रहे है उसको ठीक से आत्मसात भी करें। शिक्षा सर्वश्रेष्ठ धन है । इसे चोर भी चुरा नहीं सकता । जो दूसरों को देने पर बढ़ता है। शिक्षा या विद्या अच्छा मित्र है। उत्रति का प्रथम सोपान शिक्षा है । यह एक व्यक्ति को उसके मानसिक, शारीरिक और आत्मिक स्तर को सुधारने में मदद करती है। शिक्षा हमें प्रग्रतिशील, आत्मनिर्भर, उदार,विनयी, सहनशील, जागरूक, परिश्रमी, बहुमुखी, दूरदर्शी बनाती है। शिक्षा एक व्यक्ति के लिए आन्तरिक और बाह्य ताकत प्रदान करने का सबसे महत्वपूर्ण साधन है। शिक्षा सभी का मौलिक अधिकार है और किसी भी इच्छित बदलाव और मनुष्य के मस्तिष्क व समाज के उत्थान में सक्षम है।
आज हम देखते है कि हमारे समाज में शिक्षित लोगों का प्रतिशत बहुत कम है जिसमें लड़कियों का और भी कम। मेरा सभी माता - पिता से निवेदन है कि वे लड़का और लड़की में भेदभाव किये बिना उनकी शिक्षा पर पूरा ध्यान दें। कहा भी गया है  अगर आप एक पुरुष को शिक्षित करते हैं तो आप सिर्फ एक पुरुष को शिक्षित करते हैं:लेकिन अगर आप एक स्त्री को शिक्षित करते हैं तो आप एक पूरी पीढ़ी को शिक्षित करते हैं। शिक्षा समाज और देश को मजबूत बनाती है यदि हम शिक्षित होंगें तो हमारा देश भी उन्नति करेगा। शिक्षा के महत्व को जानिए और अपने जीवन को सफल बनाए। 


जीवन एक कविता